गुरुवार, 18 दिसंबर 2008

भैजी चलीगी नेतागिरी मा

भैजी चलीगी नेतागिरी मा

माँ-बाबा रैगीनी धकों धका मा

माँ-बाबा न फोंगड़ी ब्येची

पढ़ाई-लिखाई बड़ा स्कूल मा

माँ-बाबा सोची पढ़ी-लिखीक

बणंलू म्यरू साब कै ओफिस मा

भैजी चलीगी नेतागिरी मा।

जब चलीगी सू नेतागिरी मा

त रखण क्याच अब त्येसी क्वी आशा

सू चलीगी तीं गिरी मा

जौंन दिनी देश तें निरशा

त्यौंन क्या रखण घर

सू भी शामिल ह्वेगी तीं मंडली मा

भैजी चलीगी नेतागिरी मा।।

माँ त्येरी याद औंदी परदेश मा

रूँदू छौं मैं मने-मनमा

माँ त्येरी याद औंदी परदेश मा

सुबेर कू बणूँ खाँणू खाँदू जब रात मा

माँ त्येरी याद औंदी परदेश मा

द्येखीक ये भीड़भाड़,

खुदेंदु म्यरू पराण

लगदी बाड़ुली गला मा

माँ त्येरी याद औंदी परदेश मा

क्वी नीन अफड़ु यख विदेश मा

कना भग्यान छन म्यरा भुला-भुली

जू वैठ्याँ होला त्यरा गोद मा

माँ त्येरी याद औंदी परदेश मा।।

बुधवार, 17 दिसंबर 2008

माँ राजराजेश्वरी की आरती

माँ राजराजेश्वरी की आरती

जय माँ राजराजेश्वरी,

जय माँ राजराजेश्वरी

तू हमारी कष्टदायिनी

तू दुख हमारा हरी

जय माँ राजराजेश्वरी-२

करूला रोज त्येरी पूजा

चढ़ोला रोज त्वेमा फूल

लगोलो रोज त्वेतें भोग

तू हमारी रक्षा करी

जय माँ राजराजेश्वरी—२

त्वीन मिटाईन दुखियों का दुख

अंदों तें दिनी त्वीन आँखू कू सुख

हीं कृपा हम पर भी करी

जय माँ राजराजेश्वरी—२

जैन माँ राजराजेश्वरी की पूजा

सच्चा मन सी करी

माँ राजराजेश्वरी का आशीष सी

त्येकू घर सुख संपदा सी भरी

जय माँ राजराजेश्वरी-२

मंगलवार, 16 दिसंबर 2008

भाई आज भय ह्वेगीन

भाई आज भय ह्वेगीन

बाँटा आज कै ह्वेगीन

अफूड़ु नी रे क्वी बी जग मा

नाता आज कै ह्वेगीन।

माँ न द्येखी थो याक सुबिनु

छ्वारा म्यरा जनी पाँच पांडव ह्वेगीन

पर माँ तें नी थो पता

पांडव आज कौंरव ह्वेगीन

बाँटा आज कै ह्वेगीन।।

माँ न द्येखी थो याक सुबिनु

छ्वारा जनी राम-लखन ह्वेगीन

पण माँ तें नी थो पता

राम-लखन आज रावण ह्वेगीन

बाँटा आज कै ह्वेगीन।।

कुड़ु बंङाई थो माँ न याक

सोचीक सबी रला येमा

पण माँ तें नी थो पता

कुड़ा आज कै ह्वेगीन

बाँटा आज कै ह्वेगीन

भाई आज भय ह्वेगीन।।।

सुबिना

सुबिना दिख्यंदा रंगिला-पिगिंला
मन मा औंदी एक अमंग
कब बैठूलू मैं त्यरा दगड़ा
कब होली तू म्यरा संग।
कब खिलली तू प्योंली जनी
कब लगली तू ज्योंली जनी
चमकीली जनी तरंग
मन मा औंदी एक उमंग।।
कब मिलन होलू जनू नदियों कू
हरिचूँ जनू शदियों कू
कब विछ्यौला पलंग
मन मा औंदी एक उमंग।।।


देवेन्द्र कैरवॉन

रविवार, 14 दिसंबर 2008

आवा सीखा

गढ़वाली भाषा में कुछ संबंधित शब्द और उनका हिन्दी में अनुवाद

जनानी—औरत

मनस्यारू—मर्द

न्वोंनी—लड़की

नून्याल—लड़का

मालक—पति

बाबा—पिता

बै-----माता

दीदी—बड़ी बहन

भुली---छोटी बहन

नणद—ननद

जैठाणी—जैठानी

द्युर---देवर

जिठाणुँ—जेठ(पति का बड़ा भाई)

स्वोरू---ससुर

सासु—सास

भैजी—बड़ा भाई

भुल्ला--छोटा भाई

कुछ पढ़ी तैं---------

कुछ पढ़ी तैं---

गढ़वाल का महान कवि, लेखक डॉ.पार्थसारथि डबराल कै परिचय का मोताज नी छन। त्वोंकी कुछ गढ़वाली कविता,जु की डॉ. रमेश पोखरियाल “निशंक” जी न स्मरणम् नामक किताब मा वर्णित करीन त्वों तैं मैं आप लोगु का बीचमा प्रदर्शित छों कनु । अगर कै बी महानुभाव सणी क्वी आपत्ति होली त म्यरा ई-मेल पता(dkairwan@gmail.com) पर संम्पर्क करू।

देशका प्रति---------

अखण्डित देश छ अपणो

न ये तैं होण द्या मैलो,

बणा सद्भावना क साथ

अपणो देश बिगरैलो।

समाज का जातिवाद का प्रति---

मिटै द्या जाति का बन्धन

पटै द्या वर्ण की क्यारी

लगावा जोळ तुम इन्नो

कि चौरस ह्वै जयाँ सारी।

परदेश मा पहाड़ की याद---

मेवुड़ी बासदी

दगड्या तेरी याद आंद,

बसग्याळि गदन सि ऐन

आंसु न संपुनि बगैन

प्राण उबलि-उबलि आँद

कैकि नी धराँद।