शनिवार, 27 दिसंबर 2008

गीत


एक गढ़वाली गीत

कुठारिका खाना जलमा,कुठारिका खाना

ऐ जलमा छोरी रे

बाटा-बाटा भटकूणु छौं मैं त्वे छोरी का बाना

ऐ जलमा छोरी रे,

पोथिली का गान जलमा,पोथिली का गान

ऐ जलमा छोरी रे,

ज्वानी भरीं च माया लगेदी,क्या ल्यांण यखान

ऐ जलमा छोरी रे,

छांसी कू मखन जलमा,छांसी कू मखन

ऐ जलमा छोरी रे,

सब बन्धन सी प्यारू होंदू , प्रेम कू बन्धन

ऐ जलमा छोरी रे,

घोड़ा कू कमर जलमा, घोड़ा कू कमर

ऐ जलमा छोरी रे,

साथ मरी-मिटी जोला, ह्वे जोला अमर

ऐ जलमा छोरी रे।

शुक्रवार, 26 दिसंबर 2008

बिलम्यूँ बथौं

बिलम्यूँ बथौं

इनी भटिगीगी सू अफड़ा बाटा न

जन्यू भटक्यूँ क्वी बिलम्यूँ बथौं,

इनी उलझी सू अफड़ा बाटा मा

जन्यू उलझ्यौं क्वी बिलम्यूँ बथौं,

याक दिन याद थो ते अफड़ू करम

याक दिन याद थो ते अफड़ू धरम

इनी उलझी सू पाप का जाल मा

जन्यू ----------------------I

याक दिन जाणदू थो सू अफड़ा-परायौं तें

याक दिन पछाणदू थो सू गैर-विराणौं तें

इनी उलझी सू धन का ल्वाभ मा

जन्यू---------------------------II

याक दिन थो त्येकु बाटू बी साप

मन मा नी थो त्येका क्वी पाप

इनी उलझी सू पाप का जाल मा

जन्यू--------------------------III

अब नी त्येक तें क्वी बी बाटू

बची नी अब त क्वी बी घाटू

इनी उलझी सू जग का जंजाल मा

जन्यू उलझ्यौं क्वी बिलम्यूँ बथौं IV

मंगलवार, 23 दिसंबर 2008

मना की बात

त्यरा मना की बात नी जाणी सक्यूँ मैं
माया त्येरी मैंसी नी पछाणी सक्यूँ मैं,
रैग्यौं आज इखली विराणी दुन्या मा
त्यरा-म्यरा साथ की गाँठ नी बाँधी सक्यूँ मैं।।

रविवार, 21 दिसंबर 2008

कुछ और सीखा

आवा अग्वाड़ी सीखा----------

गाय---गोड़ू

भैंस---भैंसू

बैल----बल्द

साँड---साँड

कुत्ता---कुकूर

विल्ली—विरालु

बकरी---बाखूरू

भेड़-----भ्यरा

चिड़िया—पोथली

नदी ---गाड़

खेत---फ्वगंड़ा

रास्ता—बाटू

आँगन---चौक,खल्याण

पेड़---डाया

पत्थर—डला

शुक्रवार, 19 दिसंबर 2008

याक सच्ची कथा


दादा जी बतौंदा थया

दादा जी बतौंदा थया कि याक बार मैं दगड़ी इनी घटना घटी कि म्येरू मानसिक संतुलन कुछ दिनों तक बिगडिगी थो। दादा जी अग्वाड़ी बतौंदा कि याक दिन मैं सुबेर रोजे की चरौं मंदिर मा गयौं, जनु मैं रोज कुण्डी बिठी पाणी ल्येक तें मंदिर मा चड़ोंदू थो तनी मैंन तै दिन बी गागर उठाई अर मैं पाणी ल्युणां तें कुण्डी की ओर चलीग्यौं। जांदी-जांदी म्यरा मन मा इन बी विचार आईन कि आज रात कुछ देर मा च खुलणी, कनु की सी रोज अफड़ा समय पर जांदा था। पर तै दिन शेत घड़ीन बी तौं तें ध्वका दी दिनी और सी पेली ही कुण्डी जाणा तें तयार ह्वेगीन।

जनी सी कुण्डी पौंछीन तखोकु दृश्य देखीक सी बिहोश पड़ीगीन। थ्वाड़ी देर बाद जब तौं तें होश आई त लोगोंका पूछण पर तौंन जू घटना बताई तीं सुणी तें सबी लोग दंग रैगीन।

तौंन बताई कि जनी मैं पाणी भना तें कुण्डी मा गयौं “ मैंन द्येखी कि याक जनानी कुण्डी मा च न्ह्येणीं” ‘ तींका लम्बा-लम्बा बाल द्येखीक और शरीरकी बनावट द्येखीक मैं बिहोश ह्वेग्यौं’ । तौंकी बात पूरी होंदा-होंदा याक पर द्यवता ऐगी “अर त्येन बताई कि त्वे तें(दादा जी तें) ते टेम पर तख नी जायुँ चेंदु थो तख सेम मा पार्वती थे न्ह्येणी”।

गुरुवार, 18 दिसंबर 2008

भैजी चलीगी नेतागिरी मा

भैजी चलीगी नेतागिरी मा

माँ-बाबा रैगीनी धकों धका मा

माँ-बाबा न फोंगड़ी ब्येची

पढ़ाई-लिखाई बड़ा स्कूल मा

माँ-बाबा सोची पढ़ी-लिखीक

बणंलू म्यरू साब कै ओफिस मा

भैजी चलीगी नेतागिरी मा।

जब चलीगी सू नेतागिरी मा

त रखण क्याच अब त्येसी क्वी आशा

सू चलीगी तीं गिरी मा

जौंन दिनी देश तें निरशा

त्यौंन क्या रखण घर

सू भी शामिल ह्वेगी तीं मंडली मा

भैजी चलीगी नेतागिरी मा।।

माँ त्येरी याद औंदी परदेश मा

रूँदू छौं मैं मने-मनमा

माँ त्येरी याद औंदी परदेश मा

सुबेर कू बणूँ खाँणू खाँदू जब रात मा

माँ त्येरी याद औंदी परदेश मा

द्येखीक ये भीड़भाड़,

खुदेंदु म्यरू पराण

लगदी बाड़ुली गला मा

माँ त्येरी याद औंदी परदेश मा

क्वी नीन अफड़ु यख विदेश मा

कना भग्यान छन म्यरा भुला-भुली

जू वैठ्याँ होला त्यरा गोद मा

माँ त्येरी याद औंदी परदेश मा।।