शनिवार, 29 नवंबर 2008

चला गौं चला

चला गौं चला-------

चला दिदों चला गौं चला

अफड़ी भूमि पर कुछ दिन बितोला

दिदी-भूलौं दड़ी हम बी कुछ दिन ख्यला

जख ब्वै रूणी हमारा खातिर

जख ब्वै द्यखणी हमारू बाटू

जख बाबाजी बैठ्याँ तिबारी मा

टक लगैक तै बाटा मा

चला भूलौं चला गौं चला

ख्यला हम बी हिंदोआ बणों मा

गौं कि याद जब औंदी कबी

त रूँदू मन, मने मा

सोचमा पड़ी जाँदू मैं

कि हौंदू जू अफड़ा गौंमा बी रोजगार

त औंदू न कबी बी परदेश मा।।

1 टिप्पणी:

ARUNDEVGATIKAR ने कहा…

These poems are very good. And I want to more read that poems and want to know about the great poet.
you must watch my blog 'ifwethink'.
Thanks
--Arun